
असम की राजनीति में चुनावी बिगुल बज चुका है… और इस बार लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि नैरेटिव की है। मंच पर बड़े-बड़े चेहरे, कैमरों की चमक, और शब्दों में लिपटा विकास का वादा—लेकिन सवाल वही पुराना: क्या ये संकल्प ज़मीन तक पहुंचेगा या सिर्फ कागज़ तक सीमित रहेगा?
केंद्रीय मंत्री Nirmala Sitharaman ने जैसे ही BJP का संकल्प पत्र जारी किया, असम की सियासत में गर्मी और बढ़ गई। यह सिर्फ एक घोषणापत्र नहीं, बल्कि 2026 की सत्ता की लड़ाई का रोडमैप है।
“संकल्प पत्र” या चुनावी ब्लूप्रिंट?
असम में 126 सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले BJP ने अपना विज़न साफ कर दिया है। मंच पर Himanta Biswa Sarma, Sarbananda Sonowal और Nirmala Sitharaman जैसे दिग्गज मौजूद थे—और संदेश साफ था: “तीसरी बार सत्ता चाहिए, और उसके लिए बड़ा दांव खेलेंगे।”
सीतारमण ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “6 दशकों में जो नहीं हुआ, वो एक दशक में दिखा है।” लेकिन राजनीति में दावा और डेटा—दोनों की अपनी-अपनी सच्चाई होती है।
2 लाख नौकरियां: वादा या वोट मैग्नेट?
मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने सबसे बड़ा ऐलान किया—अगले 5 साल में 2 लाख नौकरियां। यह आंकड़ा सुनते ही युवाओं में उम्मीद जगी, लेकिन विपक्ष इसे “चुनावी लॉलीपॉप” बता रहा है। सवाल उठता है— क्या सरकारी ढांचे में इतनी नौकरियां संभव हैं? या फिर यह सिर्फ आंकड़ों का खेल है?
UCC और ‘लव जिहाद’ पर सख्ती
BJP ने अपने संकल्प पत्र में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने की बात कही है—हालांकि कुछ जनजातीय क्षेत्रों को इससे बाहर रखा जाएगा।
इसके साथ ही “लव जिहाद” के खिलाफ कड़े कानून का भी वादा किया गया है। यह वही मुद्दे हैं जो चुनावी ध्रुवीकरण को तेज करते हैं—और BJP इन्हें खुलकर भुनाने के मूड में दिख रही है।
बाढ़ मुक्त असम: 18,000 करोड़ का प्लान
असम की सबसे बड़ी समस्या—बाढ़। हर साल तबाही, हर साल वादे… और हर साल वही हालात। इस बार सरकार ने दावा किया है कि पहले दो साल में ₹18,000 करोड़ खर्च कर बाढ़ नियंत्रण किया जाएगा। लेकिन जमीनी सच्चाई ये है कि दशकों से बाढ़ राजनीति का हिस्सा रही है—समाधान कम, बयान ज्यादा।

“घर-घर जाकर बनाया गया संकल्प”
Sarbananda Sonowal ने दावा किया कि यह संकल्प पत्र जनता के सुझावों से बना है। 3 लाख लोगों से सुझाव लिए गए। हर जिले में पहुंचकर फीडबैक लिया गया।
यह दावा लोकतंत्र की ताकत दिखाता है… लेकिन क्या यह वास्तविक सहभागिता थी या सिर्फ डेटा कलेक्शन?
कांग्रेस vs BJP: सीधी टक्कर
इस चुनाव में मुकाबला साफ है—BJP का “विकास + राष्ट्रवाद” मॉडल- कांग्रेस का “स्थानीय मुद्दे + बेरोजगारी” नैरेटिव।
सीतारमण ने कांग्रेस पर हमला बोला, तो विपक्ष ने BJP पर “वादा बनाम हकीकत” का आरोप लगाया।
“वादा बनाम वोट बैंक”
सियासत में घोषणापत्र वो किताब है जिसे चुनाव के बाद शायद ही कोई पढ़ता है। हर पार्टी अपने वादों को “ऐतिहासिक” बताती है—लेकिन इतिहास गवाह है कि जनता की याददाश्त से ज्यादा मजबूत कुछ नहीं। सवाल सीधा है क्या यह संकल्प असम को बदलेगा? या फिर यह सिर्फ एक और चुनावी स्क्रिप्ट है?
वोटिंग: 9 अप्रैल 2026
रिजल्ट: 4 मई 2026
